कुरान - 12:33 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
قَالَ رَبِّ ٱلسِّجۡنُ أَحَبُّ إِلَيَّ مِمَّا يَدۡعُونَنِيٓ إِلَيۡهِۖ وَإِلَّا تَصۡرِفۡ عَنِّي كَيۡدَهُنَّ أَصۡبُ إِلَيۡهِنَّ وَأَكُن مِّنَ ٱلۡجَٰهِلِينَ

Transliteration: (Qaala rabbis sijnu ahabbu ilaiya mimma yad'oo naneee 'ilaihi wa illaa tasrif 'annee kaidahunna asbu ilaihinna wa akum minal jaahileen)

यूसुफ़ ने दुआ की, "ऐ मेरे रब! मुझे क़ैदखाना (जेल) उस काम की तुलना में कहीं अधिक प्रिय है जिसकी ओर ये मुझे बुलाती हैं; और यदि तूने इनके छल-कपट को मुझसे न फेरा, तो मैं इनकी ओर झुक पड़ूँगा और अज्ञानी लोगों में से हो जाऊँगा!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 33 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "رَبِّ السِّجْنُ أَحَبُّ إِلَيَّ" – पाप के मुक़ाबले में जेल को प्राथमिकता

यह एक सच्चे मोमिन के चरित्र का शिखर है। हज़रत यूसुफ़ ने महल के ऐशो-आराम और पाप के प्रस्ताव को ठुकराकर काल-कोठरी की यातना को खुशी से चुन लिया ताकि अल्लाह की नाफ़रमानी से बच सकें। साथ ही उन्होंने अपने आत्म-संयम पर घमंड नहीं किया, बल्कि अल्लाह से दुआ की कि तेरी तौफ़ीक़ और हिफ़ाज़त के बिना कोई इंसान गुनाह से नहीं बच सकता।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now