कुरान - 12:35 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
ثُمَّ بَدَا لَهُم مِّنۢ بَعۡدِ مَا رَأَوُاْ ٱلۡأٓيَٰتِ لَيَسۡجُنُنَّهُۥ حَتَّىٰ حِينٖ

Transliteration: (Summa badaa lahum min ba'di maa ra-awul Aayaati layasjununnahoo hatta heen)

फिर उन (दरबारियों) को यूसुफ़ की पवित्रता की सारी निशानियां देख लेने के बाद भी यही उचित जान पड़ा कि एक निर्धारित समय तक उन्हें अवश्य क़ैद में डाल दें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 35 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] बेगुनाह होने के बावजूद जेल की सज़ा

अज़ीज़ और दरबारियों को पूरी तरह विश्वास था कि यूसुफ़ सौ प्रतिशत निर्दोष और पाक-दामन हैं, लेकिन ज़ुलैख़ा और महल की बदनामी पर पर्दा डालने और जनता में यह दिखाने के लिए कि ग़लती ग़ुलाम की थी, उन्होंने बेगुनाह यूसुफ़ को जेल भेज दिया। ज़ालिम व्यवस्था में अक्सर बेगुनाहों को ही बलि का बकरा बनाया जाता है।

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