कुरान - 12:37 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
قَالَ لَا يَأۡتِيكُمَا طَعَامٞ تُرۡزَقَانِهِۦٓ إِلَّا نَبَّأۡتُكُمَا بِتَأۡوِيلِهِۦ قَبۡلَ أَن يَأۡتِيَكُمَاۚ ذَٰلِكُمَا مِمَّا عَلَّمَنِي رَبِّيٓۚ إِنِّي تَرَكۡتُ مِلَّةَ قَوۡمٖ لَّا يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَهُم بِٱلۡأٓخِرَةِ هُمۡ كَٰفِرُونَ

Transliteration: (Qaala laa ya'teekumaa ta'aamun turzaqaaniheee illaa nabba'tukumaa bi ta'weelihee; qabla any ya'ti yakumaa; zaalikumaa mimmaa 'allamanee rabbee; innee taraktu millata qawmil laa yu'minoona billaahi wahum bil aakhirati hum kaafiroon)

यूसुफ़ ने कहा, "तुम्हें जो खाना दिया जाता है वह तुम्हारे पास आने भी न पाएगा कि उससे पहले ही मैं तुम्हें इसकी ताबीर बता दूँगा; यह उन (विद्याओं) में से है जो मेरे रब ने मुझे सिखाई हैं; निस्संदेह, मैंने उन लोगों के धर्म को छोड़ दिया है जो अल्लाह पर ईमान नहीं लाते और वे ही आख़िरत के भी मुंकिर हैं।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 37 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दावत-ए-दीन का हिकमत भरा अवसर

हज़रत यूसुफ़ ने ख़्वाब की ताबीर बताने से पहले अपनी सच्चाई का प्रमाण दिया कि जो खाना तुम्हारे पास आएगा मैं पहले ही बता सकता हूँ कि वह क्या होगा। साथ ही यह स्पष्ट किया कि यह ज्ञान किसी जादू या ज्योतिष का नहीं, बल्कि अल्लाह का दिया हुआ इल्म है। एक सच्चे पैग़म्बर की तरह उन्होंने इस मौक़े को तौहीद की दावत के लिए इस्तेमाल किया।

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