कुरान - 12:38 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
وَٱتَّبَعۡتُ مِلَّةَ ءَابَآءِيٓ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡحَٰقَ وَيَعۡقُوبَۚ مَا كَانَ لَنَآ أَن نُّشۡرِكَ بِٱللَّهِ مِن شَيۡءٖۚ ذَٰلِكَ مِن فَضۡلِ ٱللَّهِ عَلَيۡنَا وَعَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Wattaba'tu millata aabaaa'eee Ibraaheema wa Ishaaqa wa Ya'qoob; maa kaana lanaaa an nushrika billaahi min shai'; zaalikamin fadlil laahi 'alainaa wa 'alan naasi wa laakinna aksaran naasi laa yashkuroon)

"और मैंने अपने पूर्वजों—इबराहीम, इसहाक़ और याक़ूब—के धर्म का अनुसरण किया है; हमारे लिए कदापि यह उचित नहीं कि हम किसी चीज़ को अल्लाह का साझीदार ठहराएँ; यह हम पर और तमाम इंसानों पर अल्लाह का बड़ा अनुग्रह (फ़ज़ल) है, लेकिन अधिकांश लोग शुक्र नहीं करते।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 38 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] इबराहीमी तौहीद का गौरवशाली परिचय

हज़रत यूसुफ़ ने मिस्र के बहुदेववादी (शिर्क वाले) माहौल में खुले शब्दों में घोषणा की कि मेरा धर्म एकेश्वरवाद (तौहीद) है जो हज़रत इबराहीम, इसहाक़ और याक़ूब का सनातन धर्म है। तौहीद अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है जिससे इंसान झूठे देवताओं और अंधविश्वासों की ग़ुलामी से आज़ाद हो जाता है।

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