कुरान - 12:39 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
يَٰصَٰحِبَيِ ٱلسِّجۡنِ ءَأَرۡبَابٞ مُّتَفَرِّقُونَ خَيۡرٌ أَمِ ٱللَّهُ ٱلۡوَٰحِدُ ٱلۡقَهَّارُ

Transliteration: (Yaa saahibayis sijni 'a-arbaabum mutafarriqoona khayrun amil laahul waahidul qahhaar)

"ऐ मेरे क़ैदखाने के साथियो! क्या अलग-अलग अनेक पूज्य (रब) बेहतर हैं या वह एक अकेला अल्लाह जो सब पर सर्वोपरि (अल-क़ह्ह़ार) है?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 39 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "أَأَرْبَابٌ مُّتَفَرِّقُونَ خَيْرٌ أَمِ اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ" – तौहीद का सीधा तार्किक सवाल

हज़रत यूसुफ़ ने दिल को छू लेने वाला बौद्धिक तर्क दिया: क्या अलग-अलग कमज़ोर और बेबस पूज्यों का गुलाम बनना बेहतर है, या उस एक शक्तिशाली और अजेय रब की बंदगी करना जो पूरे ब्रह्मांड पर पूर्ण नियंत्रण रखता है? यह सवाल इंसान को स्वाभाविक रूप से तौहीद की ओर खींचता है।

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