कुरान - 12:36 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَدَخَلَ مَعَهُ ٱلسِّجۡنَ فَتَيَانِۖ قَالَ أَحَدُهُمَآ إِنِّيٓ أَرَىٰنِيٓ أَعۡصِرُ خَمۡرٗاۖ وَقَالَ ٱلۡأٓخَرُ إِنِّيٓ أَرَىٰنِيٓ أَحۡمِلُ فَوۡقَ رَأۡسِي خُبۡزٗا تَأۡكُلُ ٱلطَّيۡرُ مِنۡهُۖ نَبِّئۡنَا بِتَأۡوِيلِهِۦٓۖ إِنَّا نَرَىٰكَ مِنَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Wa dakhala ma'a hussijna fata-yaan; qaala ahaduhumaaa inneee araaneee a'siru khamranw wa qaalal aakharu inneee araaneee ahmilu fawqa ra'see khubzan ta'kulut tairu minhu; nabbi'naa bi ta'weelih; innaa naraaka minal muhsineen)

और उनके साथ दो नौजवान (शाही सेवक) क़ैदखाने में दाख़िल हुए; उनमें से एक ने कहा, "मैंने (ख़्वाब में) देखा है कि मैं शराब (अंगूर का रस) निचोड़ रहा हूँ;" और दूसरे ने कहा, "मैंने देखा है कि मैं अपने सिर पर रोटियाँ उठाए हुए हूँ जिसमें से परिंदे खा रहे हैं; हमें इसकी ताबीर (अर्थ) बताइए; निस्संदेह, हम आपको नेकी करने वालों (मुहसिनीन) में से देखते हैं।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 36 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] क़ैदखाने में दो कैदी और उनके ख़्वाब

राजा के दो ख़ास मुलाज़िम—एक साक़ी (शराब पिलाने वाला) और दूसरा शाही बावर्ची (नानबाई)—ज़हर देने की साज़िश के शक में जेल भेजे गए थे। हज़रत यूसुफ़ की इबादत, अख़लाक़ और नेकी देखकर वे अत्यंत प्रभावित हुए और अपने अजीब सपनों की ताबीर जानने के लिए उनके पास आए।

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