कुरान - 12:32 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
قَالَتۡ فَذَٰلِكُنَّ ٱلَّذِي لُمۡتُنَّنِي فِيهِۖ وَلَقَدۡ رَٰوَدتُّهُۥ عَن نَّفۡسِهِۦ فَٱسۡتَعۡصَمَۖ وَلَئِن لَّمۡ يَفۡعَلۡ مَآ ءَامُرُهُۥ لَيُسۡجَنَنَّ وَلَيَكُونٗا مِّنَ ٱلصَّـٰغِرِينَ

Transliteration: (Qaalat fazaalikunnal lazee lumtunnanee feeh; wa laqad raawattuhoo 'an nafsihee fasta'sam; wa la'il lam yaf'al maaa aamuruhoo la yusjananna wa la yakoonan minas saaghireen)

उसने कहा, "तो यही वह (नौजवान) है जिसके बारे में तुम मुझे ताने दे रही थीं! और निस्संदेह, मैंने उसे अपने वश में करने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन वह पाक-दामन (पवित्र) रहा; और यदि इसने वह न किया जिसका मैं इसे हुक्म देती हूँ, तो यह अवश्य ही क़ैद कर दिया जाएगा और अपमानित लोगों में से हो जाएगा!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 32 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ज़ुलैख़ा का खुला इक़रार और जेल की धमकी

ज़ुलैख़ा ने औरतों से कहा कि अब तुम्हें मालूम हुआ कि मेरी क्या बेबसी थी। उसने भरी महफ़िल में स्वीकार किया कि यूसुफ़ पूरी तरह निर्दोष और संयमी रहा। साथ ही उसने धमकी दी कि यदि अब भी इसने मेरा कहना न माना तो इसे जेल की काल-कोठरी में सड़ा दिया जाएगा।

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