कुरान - 12:30 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
۞وَقَالَ نِسۡوَةٞ فِي ٱلۡمَدِينَةِ ٱمۡرَأَتُ ٱلۡعَزِيزِ تُرَٰوِدُ فَتَىٰهَا عَن نَّفۡسِهِۦۖ قَدۡ شَغَفَهَا حُبًّاۖ إِنَّا لَنَرَىٰهَا فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Wa qaala niswatun fil madeenatim ra atul'Azeezi turaawidu fataahaa 'an nafsihee qad shaghafahaa hubbaa; innaa lana raahaa fee dalaalim mubeen)

और शहर की औरतों में बातें होने लगीं कि "अज़ीज़ की पत्नी अपने नौजवान ग़ुलाम को फुसलाने में लगी है; उसके दिल में उसकी मुहब्बत गहराई तक समा गई है; हम तो उसे खुली भूल में देख रही हैं!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 30 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] शहर की कुलीन महिलाओं की चर्चाएं

महल का यह गुप्त मामला शहर के अभिजात्य वर्ग की औरतों तक पहुँच गया। वे ज़ुलैख़ा पर ताने कसने लगीं कि एक मंत्री की पत्नी होकर अपने ही ग़ुलाम पर रीझ गई है और अपनी मर्यादा भूल बैठी है।

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