कुरान - 12:45 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَقَالَ ٱلَّذِي نَجَا مِنۡهُمَا وَٱدَّكَرَ بَعۡدَ أُمَّةٍ أَنَا۠ أُنَبِّئُكُم بِتَأۡوِيلِهِۦ فَأَرۡسِلُونِ

Transliteration: (Wa qaalal lazee najaa minhumaa waddakara ba'da ummatin ana unabbi'ukum bi ta'weelihee fa-arsiloon)

और उन दोनों में से जो व्यक्ति बच गया था, उसे एक मुद्दत (लंबे समय) के बाद याद आया और उसने कहा, "मैं तुम्हें इसकी ताबीर बताता हूँ, मुझे (क़ैदखाने की तरफ़) भेज दो!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 45 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] साक़ी को हज़रत यूसुफ़ की याद आना

दरबारियों की असफलता देखकर उस साक़ी को अचानक कई वर्षों बाद जेल में हज़रत यूसुफ़ की सच्चाई और ख़्वाबों की सटीक ताबीर याद आई। उसने राजा से अनुमति मांगी कि मुझे जेल जाने दें, मैं इसका सही अर्थ लेकर आता हूँ।

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