कुरान - 12:5 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
قَالَ يَٰبُنَيَّ لَا تَقۡصُصۡ رُءۡيَاكَ عَلَىٰٓ إِخۡوَتِكَ فَيَكِيدُواْ لَكَ كَيۡدًاۖ إِنَّ ٱلشَّيۡطَٰنَ لِلۡإِنسَٰنِ عَدُوّٞ مُّبِينٞ

Transliteration: (Qaala yaa bunaiya laa taqsus ru'yaaka 'alaaa ikhwatika fayakeedoo laka kaidaa; innash Shaitaana lil insaani 'aduwwum mubeen)

उन्होंने कहा, "ऐ मेरे प्यारे बेटे! अपना यह ख़्वाब अपने भाइयों के सामने बयान न करना, कहीं ऐसा न हो कि वे तुम्हारे ख़िलाफ़ कोई चाल (साज़िश) चलें; निस्संदेह, शैतान इंसान का खुला दुश्मन है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 5 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की समझदारी और हिफ़ाज़त

हज़रत याक़ूब नबी थे और ख़्वाब की ताबीर समझ गए कि अल्लाह यूसुफ़ को नुबुव्वत और महान मर्तबा अता फ़रमाएगा। उन्हें अंदेशा था कि सौतेले भाई ईर्ष्या (हसद) के कारण शैतानी बहकावे में आकर यूसुफ़ को नुक़सान पहुँचाने की साज़िश न रचें। यह आयत सिखाती है कि किसी नेमत या ख़ास बशारत को हसद करने वालों से छुपाकर रखना हिकमत की बात है।

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