कुरान - 12:4 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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إِذۡ قَالَ يُوسُفُ لِأَبِيهِ يَـٰٓأَبَتِ إِنِّي رَأَيۡتُ أَحَدَ عَشَرَ كَوۡكَبٗا وَٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَ رَأَيۡتُهُمۡ لِي سَٰجِدِينَ

Transliteration: (Iz qaala Yoosufu li abeehi yaaa abati innee ra aytu ahada 'ashara kawkabanw wash shamsa walqamara ra aytuhum lee saajideen)

जब यूसुफ़ ने अपने पिता (याक़ूब) से कहा, "ऐ मेरे अब्बा जान! मैंने (ख़्वाब में) ग्यारह सितारों और सूरज और चाँद को देखा है; मैंने उन्हें अपने आगे सजदा करते हुए देखा है!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 4 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का स्वप्न

हज़रत यूसुफ़ ने बचपन में यह सच्चा रूहानी ख़्वाब देखा था। तफ़्सीर में आता है कि ग्यारह सितारों से मुराद उनके ग्यारह भाई थे, सूरज से मुराद उनके वालिद हज़रत याक़ूब और चाँद से मुराद उनकी माँ/ख़ाला थीं। यह सजदा इबादत का नहीं, बल्कि ताज़ीम (सम्मान) का सजदा था जो उस ज़माने की शरीअत में जायज़ था।

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