Transliteration: (Nahnu naqussu 'alaika ahsanal qasasi bimaaa awhainaaa ilaika haazal quraana wa in kunta min qablihee laminal ghaafileen)
सूरह यूसुफ़ को क़ुरआन में 'अहसनुल-क़सस' (सर्वोत्तम वृत्तांत) कहा गया है। इसमें जीवन के हर पहलू—पिता-पुत्र का प्रेम, भाइयों की ईर्ष्या, ग़ुलामी और आज़माइश, संयम और चरित्र की पवित्रता, जेल का सब्र, राजकीय सत्ता, क्षमाशीलता और तौहीद की सर्वोच्चता—का अत्यंत मार्मिक, धाराप्रवाह और आध्यात्मिक चित्रण है।
मक्का के यहूदियों ने मुशरिकीन से कहकर नबी ﷺ की परीक्षा के लिए सवाल करवाया था कि बताओ हज़रत यूसुफ़ मिस्र कैसे पहुँचे? नबी ﷺ ने बिना किसी मानवीय शिक्षक के पूरा इतिहास ज्यों का त्यों सुना दिया, जो ईश्वरीय वह्य का अकाट्य प्रमाण है।
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