कुरान - 12:3 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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نَحۡنُ نَقُصُّ عَلَيۡكَ أَحۡسَنَ ٱلۡقَصَصِ بِمَآ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانَ وَإِن كُنتَ مِن قَبۡلِهِۦ لَمِنَ ٱلۡغَٰفِلِينَ

Transliteration: (Nahnu naqussu 'alaika ahsanal qasasi bimaaa awhainaaa ilaika haazal quraana wa in kunta min qablihee laminal ghaafileen)

हम आपके सामने सबसे सुंदर क़िस्सा (अहसनुल-क़सस) बयान करते हैं उस वह्य के ज़रिए जो हमने इस क़ुरआन में आपकी ओर भेजी है, यद्यपि आप इससे पहले (इस ऐतिहासिक वृत्तांत से) बिल्कुल बेख़बर थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 3 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "أَحْسَنَ الْقَصَصِ" – सबसे सुंदर क़िस्सा

सूरह यूसुफ़ को क़ुरआन में 'अहसनुल-क़सस' (सर्वोत्तम वृत्तांत) कहा गया है। इसमें जीवन के हर पहलू—पिता-पुत्र का प्रेम, भाइयों की ईर्ष्या, ग़ुलामी और आज़माइश, संयम और चरित्र की पवित्रता, जेल का सब्र, राजकीय सत्ता, क्षमाशीलता और तौहीद की सर्वोच्चता—का अत्यंत मार्मिक, धाराप्रवाह और आध्यात्मिक चित्रण है।

✅ [2] रसूलुल्लाह ﷺ की नुबुव्वत का प्रमाण

मक्का के यहूदियों ने मुशरिकीन से कहकर नबी ﷺ की परीक्षा के लिए सवाल करवाया था कि बताओ हज़रत यूसुफ़ मिस्र कैसे पहुँचे? नबी ﷺ ने बिना किसी मानवीय शिक्षक के पूरा इतिहास ज्यों का त्यों सुना दिया, जो ईश्वरीय वह्य का अकाट्य प्रमाण है।

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