कुरान - 20:10 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
إِذۡ رَءَا نَارٗا فَقَالَ لِأَهۡلِهِ ٱمۡكُثُوٓاْ إِنِّيٓ ءَانَسۡتُ نَارٗا لَّعَلِّيٓ ءَاتِيكُم مِّنۡهَا بِقَبَسٍ أَوۡ أَجِدُ عَلَى ٱلنَّارِ هُدٗى

Transliteration: (Iz ra aa naaran faqaala li ahlihim kusooo inneee aanastu naaral la'alleee aateekum minhaa biqabasin aw ajidu 'alan naari hudaa)

10. जब उन्होंने एक आग देखी, तो अपने घर वालों से कहा, 'ठहरो [9]! मैंने एक आग देखी है; शायद मैं उसमें से कोई अंगारा तुम्हारे लिए लाऊं या आग पर कोई राह दिखाने वाला पाऊं [10]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 10 की तफ़सीर

"जब उन्होंने एक आग देखी, तो अपने घर वालों से कहा, 'ठहरो [9]! मैंने एक आग देखी है; शायद मैं उसमें से कोई अंगारा तुम्हारे लिए लाऊं या आग पर कोई राह दिखाने वाला पाऊं [10]।' "

[9] तन्हाई और तजल्ली का मक़ाम

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने अहल-ओ-अयाल से फ़रमाया कि तुम यहीं ठहरो। यह इस हिकमत के तहत था कि अल्लाह से कलाम और हुज़ूरी का मक़ाम तन्हाई और यकसूई का मक़ाम होता है।

[10] आग नहीं, नूर-ए-इलाही की तजल्ली

जो चीज़ दूर से आग नज़र आ रही थी, हक़ीक़त में वह नूर-ए-इलाही की तजल्ली थी। हज़रत मूसा ने ज़ाहिरी तौर पर आग का अंगारा या रास्ता तलाश करने का इरादा फ़रमाया, लेकिन अल्लाह तआला ने उन्हें नबुव्वत का नूर और हक़ीक़ी हिदायत का रास्ता अता फ़रमा दिया।

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