Transliteration: (Falammaaa ataahaa noodiya yaa Moosaa)
"फिर जब वह उस आग के क़रीब पहुंचे [11], तो एक आवाज़ दी गई, 'ऐ मूसा!' "
हज़रत मूसा जब उस मुक़द्दस मक़ाम पर पहुंचे तो एक हरे-भरे दरख़्त में से नूर चमक रहा था और कोई आग की तपिश नहीं थी। उसी दरख़्त की सिम्त से अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा को उनके नाम से पुकारा: 'ऐ मूसा!'
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