कुरान - 20:11 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
فَلَمَّآ أَتَىٰهَا نُودِيَ يَٰمُوسَىٰٓ

Transliteration: (Falammaaa ataahaa noodiya yaa Moosaa)

11. फिर जब वह उस आग के क़रीब पहुंचे [11], तो एक आवाज़ दी गई, 'ऐ मूसा!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 11 की तफ़सीर

"फिर जब वह उस आग के क़रीब पहुंचे [11], तो एक आवाज़ दी गई, 'ऐ मूसा!' "

[11] निदा-ए-इलाही और दरख़्त से कलाम

हज़रत मूसा जब उस मुक़द्दस मक़ाम पर पहुंचे तो एक हरे-भरे दरख़्त में से नूर चमक रहा था और कोई आग की तपिश नहीं थी। उसी दरख़्त की सिम्त से अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा को उनके नाम से पुकारा: 'ऐ मूसा!'

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