कुरान - 20:101 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

101
خَٰلِدِينَ فِيهِۖ وَسَآءَ لَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ حِمۡلٗا

Transliteration: (Khaalideena feehi wa saaa'a lahum Yawmal Qiyaamati himlaa)

101. वे हमेशा उसमें रहेंगे [144], और क़ियामत के दिन उनके लिए यह कितना बुरा बोझ होगा! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 101 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 101 की तफ़सीर

"वे हमेशा उसमें रहेंगे [144], और क़ियामत के दिन उनके लिए यह कितना बुरा बोझ होगा!"

[144] दायमी अज़ाब सिर्फ़ काफ़िरों के लिए

हमेशा का अज़ाब सिर्फ़ कुफ़्र पर मरने वालों के लिए है। गुनहगार मोमिन अपनी सज़ा भुगत कर या शफ़ाअत के ज़रिये जहन्नम से निकाल लिए जाएंगे।

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