कुरान - 20:102 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

102
يَوۡمَ يُنفَخُ فِي ٱلصُّورِۚ وَنَحۡشُرُ ٱلۡمُجۡرِمِينَ يَوۡمَئِذٖ زُرۡقٗا

Transliteration: (Yawma yunfakhu fissoori wa nahshurul mujrimeena Yawma 'izin zurqaa)

102. जिस दिन सूर फूंका जाएगा और हम उस दिन मुजरिमों को नीली आँखों वाले करके उठाएंगे [145] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 102 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 102 की तफ़सीर

"जिस दिन सूर फूंका जाएगा और हम उस दिन मुजरिमों को नीली आँखों वाले करके उठाएंगे [145] ।"

[145] महशर में मुजरिमों की अलामात

क़ियामत के दिन काफ़िरों के चेहरे सियाह, आंखें ख़ौफ़ से नीली और हाथ बंधे होंगे, जिससे हर शख़्स मोमिन और काफ़िर में साफ़ फ़र्क़ पहचान लेगा।

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