कुरान - 20:103 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
يَتَخَٰفَتُونَ بَيۡنَهُمۡ إِن لَّبِثۡتُمۡ إِلَّا عَشۡرٗا

Transliteration: (Yatakhaafatoona bainahum il labistum illaa 'ashraa)

103. वे आपस में चुपके-चुपके कहेंगे कि 'तुम (दुनिया में) सिर्फ़ दस दिन ही ठहरे थे' [146] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 103 की तफ़सीर

"वे आपस में चुपके-चुपके कहेंगे कि 'तुम सिर्फ़ दस दिन ही ठहरे थे' [146] ।"

[146] दुनियावी ज़िंदगी की बे-हक़ीक़ती

महशर की हौलनाकी देखकर उन्हें अपनी साठ-सत्तर साला ज़िंदगी सिर्फ़ चंद दिन की मानिंद मालूम होगी।

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