कुरान - 20:107 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

107
لَّا تَرَىٰ فِيهَا عِوَجٗا وَلَآ أَمۡتٗا

Transliteration: (Laa taraa feehaa 'iwajanw wa laaa amtaa)

107. 'जिसमें तुम न कोई मोड़ देखोगे और न कोई टीला।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 107 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 107 की तफ़सीर

" 'जिसमें तुम न कोई मोड़ देखोगे और न कोई टीला।' "

बे-दाग़ और सपाट ज़मीन

पूरी ज़मीन पर कोई गड्ढा, उभार या रुकावट नहीं होगी ताकि सब लोग एक-दूसरे को देख सकें।

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