कुरान - 20:109 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

109
يَوۡمَئِذٖ لَّا تَنفَعُ ٱلشَّفَٰعَةُ إِلَّا مَنۡ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحۡمَٰنُ وَرَضِيَ لَهُۥ قَوۡلٗا

Transliteration: (Yawma 'izil laa tanfa'ush shafaa'atu illaa man azina lahur Rahmaanu wa radiya lahoo qawlaa)

109. उस दिन किसी की शफ़ाअत काम न देगी [152] सिवाए उसके जिसे रहमान ने इजाज़त दी हो [153] और जिसकी बात वह पसंद फ़रमाए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 109 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 109 की तफ़सीर

"उस दिन किसी की शफ़ाअत काम न देगी [152] सिवाए उसके जिसे रहमान ने इजाज़त दी हो [153] और जिसकी बात वह पसंद फ़रमाए।"

[152] काफ़िरों के लिए शफ़ाअत की नफ़ी

काफ़िरों के लिए क़ियामत के दिन किसी की कोई शफ़ाअत न होगी। शफ़ाअत सिर्फ़ अहले ईमान के गुनाहों की बख़्शिश के लिए होगी।

[153] शफ़ाअत-ए-कुबरा और हुज़ूर (ﷺ) का मक़ाम

हमारे प्यारे नबी (ﷺ) को अल्लाह तआला ने शफ़ीउल मुज़्निबीन (गुनहगारों का शफ़ीअ) बनाया है। महशर में जब सब नबी 'नफ़्सी-नफ़्सी' कहेंगे, हुज़ूर (ﷺ) सजदे में गिरकर अपनी उम्मत के लिए शफ़ाअत फ़रमाएंगे और रब फ़रमाएगा: "ऐ महबूब! सर उठाइए, कहिए सुना जाएगा, मांगिए दिया जाएगा, शफ़ाअत कीजिए क़बूल होगी।"

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