कुरान - 20:111 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

111
۞وَعَنَتِ ٱلۡوُجُوهُ لِلۡحَيِّ ٱلۡقَيُّومِۖ وَقَدۡ خَابَ مَنۡ حَمَلَ ظُلۡمٗا

Transliteration: (Wa 'anatil wujoohu lil Haiiyil Qaiyoomi wa qad khaaba man hamala zulmaa)

111. और सब मुंह उस हमेशा ज़िंदा और सब को थामने वाले (हैय्युम क़य्यूम) के सामने झुक जाएंगे [155]; और बेशक वह नामुराद रहा जिसने ज़ुल्म का बोझ उठाया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 111 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 111 की तफ़सीर

"और सब मुंह उस हमेशा ज़िंदा और सब को थामने वाले के सामने झुक जाएंगे [155]; और बेशक वह नामुराद रहा जिसने ज़ुल्म का बोझ उठाया।"

[155] बारगाह-ए-इलाही में आजिज़ाना हुज़ूरी

क़ियामत के दिन मोमिन और काफ़िर सब के सब अल्लाह तआला के जलाल व किबरियाई के सामने बेबस होकर सर झुकाए खड़े होंगे। मगर काफ़िरों की यह लाचारी उनके किसी काम न आएगी क्योंकि उन्होंने दुनिया में सरकशी और ज़ुल्म किया था।

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