कुरान - 20:110 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
يَعۡلَمُ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَمَا خَلۡفَهُمۡ وَلَا يُحِيطُونَ بِهِۦ عِلۡمٗا

Transliteration: (Ya'lamu maa bainaa aideehim wa maa khalfahum wa laa yuheetoona bihee 'ilmaa)

110. वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है [154], और उनका इल्म उसका अहाता नहीं कर सकता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 110 की तफ़सीर

"वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है [154], और उनका इल्म उसका अहाता नहीं कर सकता।"

[154] इल्मे मुहीत और शफ़ाअत की बुनियाद

अल्लाह तआला मख़लूक़ के गुज़िश्ता और आइंदा तमाम अहवाल को जानता है। इसी तरह हुज़ूर (ﷺ) भी अपनी उम्मत के अहवाल से बख़ूबी वाक़िफ़ हैं, क्योंकि जब तक शफ़ीअ को हाल मालूम न हो, शफ़ाअत कैसे मुम्किन हो सकती है जैसे तबीब बीमारी जाने बग़ैर इलाज नहीं कर सकता (रूहुल बयान)।

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