कुरान - 20:112 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

112
وَمَن يَعۡمَلۡ مِنَ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَلَا يَخَافُ ظُلۡمٗا وَلَا هَضۡمٗا

Transliteration: (Wa mai ya'mal minas saalihaati wa huwa mu'minun falaa yakhaafu zulmanw wa laa hadmaa)

112. और जो शख़्स नेक काम करे और वह मोमिन हो [156], तो उसे न किसी ज़्यादती का ख़ौफ़ होगा और न किसी नुक़सान का [157] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 112 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 112 की तफ़सीर

"और जो शख़्स नेक काम करे और वह मोमिन हो [156], तो उसे न किसी ज़्यादती का ख़ौफ़ होगा और न किसी नुक़सान का [157] ।"

[156] आमाल की क़बूलियत के लिए ईमान की शर्त

इससे मालूम हुआ कि नेक आमाल की क़बूलियत के लिए ईमान पहली और लाज़मी शर्त है। ईमान के बग़ैर किसी अमल का सवाब आख़िरत में नहीं मिलता।

[157] ज़ुल्म व नुक़सान से बे-ख़ौफ़ी

मोमिन को यह यक़ीन होगा कि न तो उस पर किसी और के गुनाहों का बोझ डाला जाएगा (ज़्यादती), और न ही उसके अपने नेक आमाल के सवाब में कोई कमी की जाएगी (नुक़सान)।

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