Transliteration: (Wa mai ya'mal minas saalihaati wa huwa mu'minun falaa yakhaafu zulmanw wa laa hadmaa)
"और जो शख़्स नेक काम करे और वह मोमिन हो [156], तो उसे न किसी ज़्यादती का ख़ौफ़ होगा और न किसी नुक़सान का [157] ।"
इससे मालूम हुआ कि नेक आमाल की क़बूलियत के लिए ईमान पहली और लाज़मी शर्त है। ईमान के बग़ैर किसी अमल का सवाब आख़िरत में नहीं मिलता।
मोमिन को यह यक़ीन होगा कि न तो उस पर किसी और के गुनाहों का बोझ डाला जाएगा (ज़्यादती), और न ही उसके अपने नेक आमाल के सवाब में कोई कमी की जाएगी (नुक़सान)।
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