Transliteration: (Wa kazaalika anzalnaahu Qur-aanan 'Arabiyyanw wa sarrafnaa fee hi minal wa'eedi la'allahum yattaqoona aw yuhdisu lahum zikraa)
"और इसी तरह हमने इसे अरबी क़ुरआन नाज़िल फ़रमाया [158] और इसमें तरह-तरह से अज़ाब के डरावे बयान किए ताकि वे डरें या यह उनके दिलों में कोई नसीहत व फ़िक्र पैदा करे।"
जिस तरह पिछले नबियों पर उनकी अपनी क़ौमी ज़बान में किताबें नाज़िल हुईं, उसी तरह अल्लाह तआला ने अपने हबीब (ﷺ) की मुबारक मादरी ज़बान यानी फ़सीह अरबी में यह अज़ीम क़ुरआन नाज़िल फ़रमाया ताकि मफ़हूम बिल्कुल वाज़ेह रहे।
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