Transliteration: (Fata'aalal laahul Malikul Haqq; wa laa ta'jal bil Quraani min qabli ai yuqdaaa ilaika wahyuhoo wa qur Rabbi zidnee 'ilmaa)
"तो बहुत बुलंद है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है; और आप क़ुरआन पढ़ने में जल्दी न फ़रमाया करें [159] जब तक कि उसकी वही आप पर पूरी न हो जाए; और अर्ज़ कीजिए, 'ऐ मेरे रब! मुझे इल्म में तरक़्क़ी अता फ़रमा [160] ।' "
हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) जब वही लाते तो हुज़ूर (ﷺ) इस शौक़ में कि कोई लफ़्ज़ छूट न जाए, साथ-साथ जल्दी-जल्दी पढ़ते थे। अल्लाह ने फ़रमाया कि आप इत्मीनान से सुनें, इसे आपके सीने में महफ़ूज़ करना और याद कराना हमारे ज़िम्मे है।
इल्म की तलब कभी ख़त्म नहीं होनी चाहिए। अगरचे हुज़ूर (ﷺ) तमाम कायनात से ज़्यादा बा-इल्म हैं, फिर भी आपको इल्म में तरक़्क़ी की दुआ का हुक्म हुआ। इससे मालूम हुआ कि नबी करीम (ﷺ) के मरातिब और उलूम हर लम्हा तरक़्क़ी-पज़ीर हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat