कुरान - 20:114 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

114
فَتَعَٰلَى ٱللَّهُ ٱلۡمَلِكُ ٱلۡحَقُّۗ وَلَا تَعۡجَلۡ بِٱلۡقُرۡءَانِ مِن قَبۡلِ أَن يُقۡضَىٰٓ إِلَيۡكَ وَحۡيُهُۥۖ وَقُل رَّبِّ زِدۡنِي عِلۡمٗا

Transliteration: (Fata'aalal laahul Malikul Haqq; wa laa ta'jal bil Quraani min qabli ai yuqdaaa ilaika wahyuhoo wa qur Rabbi zidnee 'ilmaa)

114. तो बहुत बुलंद है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है; और आप क़ुरआन पढ़ने में जल्दी न फ़रमाया करें [159] जब तक कि उसकी वही आप पर पूरी न हो जाए; और अर्ज़ कीजिए, 'ऐ मेरे रब! मुझे इल्म में तरक़्क़ी अता फ़रमा [160] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 114 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 114 की तफ़सीर

"तो बहुत बुलंद है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है; और आप क़ुरआन पढ़ने में जल्दी न फ़रमाया करें [159] जब तक कि उसकी वही आप पर पूरी न हो जाए; और अर्ज़ कीजिए, 'ऐ मेरे रब! मुझे इल्म में तरक़्क़ी अता फ़रमा [160] ।' "

[159] नुज़ूले वही के वक़्त तिलावत में जल्दी की हिकमत

हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) जब वही लाते तो हुज़ूर (ﷺ) इस शौक़ में कि कोई लफ़्ज़ छूट न जाए, साथ-साथ जल्दी-जल्दी पढ़ते थे। अल्लाह ने फ़रमाया कि आप इत्मीनान से सुनें, इसे आपके सीने में महफ़ूज़ करना और याद कराना हमारे ज़िम्मे है।

[160] इल्म में इज़ाफ़े की दुआ

इल्म की तलब कभी ख़त्म नहीं होनी चाहिए। अगरचे हुज़ूर (ﷺ) तमाम कायनात से ज़्यादा बा-इल्म हैं, फिर भी आपको इल्म में तरक़्क़ी की दुआ का हुक्म हुआ। इससे मालूम हुआ कि नबी करीम (ﷺ) के मरातिब और उलूम हर लम्हा तरक़्क़ी-पज़ीर हैं।

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