कुरान - 20:115 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

115
وَلَقَدۡ عَهِدۡنَآ إِلَىٰٓ ءَادَمَ مِن قَبۡلُ فَنَسِيَ وَلَمۡ نَجِدۡ لَهُۥ عَزۡمٗا

Transliteration: (Wa laqad 'ahidnaaa ilaaa Aadama min qablu fanasiya wa lam najid lahoo 'azmaa (section 6))

115. और बेशक हमने इससे पहले आदम को ताकीदी हुक्म दिया था [161], फिर वे भूल गए और हमने उनमें कोई क़स्द (बुरी नीयत) न पाया [162] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 115 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 115 की तफ़सीर

"और बेशक हमने इससे पहले आदम को ताकीदी हुक्म दिया था [161], फिर वे भूल गए और हमने उनमें कोई क़स्द न पाया [162] ।"

[161] ममनूआ दरख़्त का हुक्म

हुक्म यह था कि इस ख़ास दरख़्त के फल को न खाना और न इसके क़रीब जाना।

[162] इस्मत-ए-अंबिया और निस्सि यान

हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) ने जानबूझकर नाफ़रमानी नहीं की थी, बल्कि शैतान के धोखे और क़सम खाने की वजह से इज्तिहादी ख़ता हुई। अंबिया-ए-किराम गुनाह से बिल्कुल मासूम और पाक होते हैं।

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