कुरान - 20:117 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

117
فَقُلۡنَا يَـٰٓـَٔادَمُ إِنَّ هَٰذَا عَدُوّٞ لَّكَ وَلِزَوۡجِكَ فَلَا يُخۡرِجَنَّكُمَا مِنَ ٱلۡجَنَّةِ فَتَشۡقَىٰٓ

Transliteration: (Faqulnaa yaaa Aadamu inna haazaa 'aduwwul laka wa lizawjika falaa yukhrijan nakumaa minal Jannati fatashqaa)

117. तो हमने फ़रमाया, 'ऐ आदम! बेशक यह तुम्हारा और तुम्हारी बीवी का दुश्मन है, ऐसा न हो कि यह तुम दोनों को जन्नत से निकाल दे और तुम मशक़्क़त में पड़ जाओ [164] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 117 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 117 की तफ़सीर

"तो हमने फ़रमाया, 'ऐ आदम! बेशक यह तुम्हारा और तुम्हारी बीवी का दुश्मन है, ऐसा न हो कि यह तुम दोनों को जन्नत से निकाल दे और तुम मशक़्क़त में पड़ जाओ [164] ।' "

[164] दुनियावी मशक़्क़त और मआश की जद्दो-जहद

जन्नत में हर चीज़ तैयार मिलती थी। दुनिया में जाने पर खेती-बाड़ी, कपड़ा बुनना और रोज़ी कमाने की जिस्मानी मशक़्क़त बर्दाश्त करनी पड़ेगी।

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