Transliteration: (Wa annaka laa tazma'u feehaa wa laa tadhaa)
" 'और यह कि न तुम्हें इसमें प्यास लगेगी और न धूप सताएगी [165] ।' "
हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) जिस जन्नत में थे, वह दुनिया का कोई बाग़ नहीं था बल्कि वही दायमी जन्नतुल ख़ुल्द थी जो मोमिनीन को आख़िरत में मिलेगी, जहाँ न सूरज की तपिश है और न प्यास का ग़लबा।
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