कुरान - 20:119 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

119
وَأَنَّكَ لَا تَظۡمَؤُاْ فِيهَا وَلَا تَضۡحَىٰ

Transliteration: (Wa annaka laa tazma'u feehaa wa laa tadhaa)

119. 'और यह कि न तुम्हें इसमें प्यास लगेगी और न धूप सताएगी [165] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 119 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 119 की तफ़सीर

" 'और यह कि न तुम्हें इसमें प्यास लगेगी और न धूप सताएगी [165] ।' "

[165] जन्नत-ए-ख़ुल्द की हक़ीक़त

हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) जिस जन्नत में थे, वह दुनिया का कोई बाग़ नहीं था बल्कि वही दायमी जन्नतुल ख़ुल्द थी जो मोमिनीन को आख़िरत में मिलेगी, जहाँ न सूरज की तपिश है और न प्यास का ग़लबा।

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