कुरान - 20:120 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

120
فَوَسۡوَسَ إِلَيۡهِ ٱلشَّيۡطَٰنُ قَالَ يَـٰٓـَٔادَمُ هَلۡ أَدُلُّكَ عَلَىٰ شَجَرَةِ ٱلۡخُلۡدِ وَمُلۡكٖ لَّا يَبۡلَىٰ

Transliteration: (Fa waswasa ilaihish Shaitaanu qaala yaaa Aadamu hal adulluka 'alaa shajaratil khuldi wa mulkil laa yablaa)

120. फिर शैतान ने उनके दिल में वसवसा डाला [166]; बोला, 'ऐ आदम! क्या मैं तुम्हें हमेशा की ज़िंदगी वाला दरख़्त [167] और ऐसी सल्तनत बताऊं जो कभी पुरानी न हो?' [168] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 120 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 120 की तफ़सीर

"फिर शैतान ने उनके दिल में वसवसा डाला [166]; बोला, 'ऐ आदम! क्या मैं तुम्हें हमेशा की ज़िंदगी वाला दरख़्त [167] और ऐसी सल्तनत बताऊं जो कभी पुरानी न हो?' [168]"

[166] शैतान का फ़रेब और झूठी क़सम

शैतान ने झूठी हमदर्दी दिखाकर और झूठी क़समें खाकर उन्हें धोका दिया।

[167] 'शजरतुल ख़ुल्द' (हमेशा की ज़िंदगी का दरख़्त)

उसने ममनूआ दरख़्त को हमेशा की ज़िंदगी और फ़रिश्ता बनने का वसीला बताकर पेश किया।

[168] दायमी हुकूमत का लालच

इब्लीस ने ऐसा लालच दिया कि यह फल खाओगे तो जन्नत से कभी नहीं निकाले जाओगे।

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