Transliteration: (Summaj tabbahu Rabbuhoo fataaba 'alaihi wa hadaa)
"फिर उनके रब ने उन्हें चुन लिया और अपनी रहमत से उनकी तरफ़ रुजू फ़रमाया और उन्हें अपने ख़ास क़ुर्ब का रास्ता दिखाया [172] ।"
जब हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) ने सरकारे दो आलम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (ﷺ) के वसीले से दुआ मांगी, तो बारगाह-ए-इलाही में उनकी तौबा क़बूल फ़रमाई गई और उनका मक़ाम और ज़्यादा बुलंद कर दिया गया।
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