कुरान - 20:124 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

124
وَمَنۡ أَعۡرَضَ عَن ذِكۡرِي فَإِنَّ لَهُۥ مَعِيشَةٗ ضَنكٗا وَنَحۡشُرُهُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ أَعۡمَىٰ

Transliteration: (Wa man a'rada 'an Zikree fa inna lahoo ma'eeshatan dankanw wa nahshuruhoo Yawmal Qiyaamati a'maa)

124. 'और जो शख़्स मेरे ज़िक्र से मुंह फेरेगा, तो बेशक उसके लिए तंग ज़िंदगी होगी [176] और हम उसे क़ियामत के दिन अंधा करके उठाएंगे [177] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 124 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 124 की तफ़सीर

" 'और जो शख़्स मेरे ज़िक्र से मुंह फेरेगा, तो बेशक उसके लिए तंग ज़िंदगी होगी [176] और हम उसे क़ियामत के दिन अंधा करके उठाएंगे [177] ।' "

[176] 'तंग ज़िंदगी' (मईशतन् ज़ंका) की हक़ीक़त

ज़िक्र-ए-इलाही से ग़ाफ़िल रहने वाले को अगरचे दुनिया की दौलत मिल जाए, मगर उसका दिल सुकून से महरूम रहता है। क़ब्र में उस पर अज़ाब की तंगी होगी और हवस की आग उसे बेचैन रखेगी।

[177] महशर में अंधा उठना

क़ब्र से उठते वक़्त वह अंधा होकर उठेगा और ठोकरें खाता हुआ महशर पहुँचेगा। बाद में जब हिसाब होगा तो उसकी आँखें खोल दी जाएंगी ताकि अज़ाब का मुशाहदा कर सके।

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