Transliteration: (Wa man a'rada 'an Zikree fa inna lahoo ma'eeshatan dankanw wa nahshuruhoo Yawmal Qiyaamati a'maa)
" 'और जो शख़्स मेरे ज़िक्र से मुंह फेरेगा, तो बेशक उसके लिए तंग ज़िंदगी होगी [176] और हम उसे क़ियामत के दिन अंधा करके उठाएंगे [177] ।' "
ज़िक्र-ए-इलाही से ग़ाफ़िल रहने वाले को अगरचे दुनिया की दौलत मिल जाए, मगर उसका दिल सुकून से महरूम रहता है। क़ब्र में उस पर अज़ाब की तंगी होगी और हवस की आग उसे बेचैन रखेगी।
क़ब्र से उठते वक़्त वह अंधा होकर उठेगा और ठोकरें खाता हुआ महशर पहुँचेगा। बाद में जब हिसाब होगा तो उसकी आँखें खोल दी जाएंगी ताकि अज़ाब का मुशाहदा कर सके।
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