Transliteration: (Qaala qad ooteeta su'laka yaa Moosaa)
"फ़रमाया, 'ऐ मूसा [32]! तुम्हारी मांगी हुई चीज़ें तुम्हें अता कर दी गईं।' "
इसका मतलब यह है कि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की तमाम दुआएं बारगाह-ए-इलाही में क़बूल फ़रमा ली गईं।
इससे मालूम हुआ कि हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) को हज़रत मूसा की दुआ के सबब नबूवत अता हुई। और यह भी मालूम हुआ कि हज़रत मूसा की ज़बान की लुक़्नत काफ़ी हद तक दूर हो गई जिससे वे दावत व तबलीग़ का काम ब-ख़ूबी अंजाम दे सके।
अलबत्ता कुछ असर बाक़ी रहा, इसी बिना पर फ़िरऔन ने बाद में ताना दिया था: "बल्कि मैं बेहतर हूँ इस शख़्स से जो ज़लील है और साफ़ बात भी नहीं कर सकता" (सूरह ज़ुख़रुफ़, आयत 52)।
जब नबी की दुआ से नबूवत मिल सकती है, तो औलाद, सल्तनत, शिफ़ा और दीगर हाजात भी अल्लाह के नबियों और वलियों के वसीले व दुआ से यक़ीनन हासिल हो सकती हैं। लिहाज़ा बुज़ुर्गों और अंबिया से दुआ कराना बाइसे ख़ैरो-बरकत है।
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