कुरान - 20:61 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
قَالَ لَهُم مُّوسَىٰ وَيۡلَكُمۡ لَا تَفۡتَرُواْ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبٗا فَيُسۡحِتَكُم بِعَذَابٖۖ وَقَدۡ خَابَ مَنِ ٱفۡتَرَىٰ

Transliteration: (Qaala lahum Moosaa wailakum laa taftaroo 'alal laahi kaziban fa yus hitakum bi 'azaab, wa qad khaaba manif taraa)

61. मूसा ने उनसे फ़रमाया, 'ख़राबी हो तुम्हारी! अल्लाह पर झूठ न बांधो [73] कि वह तुम्हें अज़ाब से हलाक कर दे, और बेशक वह नामुराद रहा जिसने झूठ बांधा [74] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 61 की तफ़सीर

"मूसा ने उनसे फ़रमाया, 'ख़राबी हो तुम्हारी! अल्लाह पर झूठ न बांधो [73] कि वह तुम्हें अज़ाब से हलाक कर दे, और बेशक वह नामुराद रहा जिसने झूठ बांधा [74] ।' "

[73] अल्लाह पर बोहतान और मौजिज़ात को जादू कहना

हज़रत मूसा ने फ़रमाया कि अल्लाह के सच्चे मौजिज़ात को जादू न कहो, क्योंकि ऐसा कहना अल्लाह पर खुला बोहतान और झूठ बांधना है। इससे मालूम हुआ कि नबियों पर इल्ज़ाम तराशी करना दर-हक़ीक़त अल्लाह तआला पर झूठ बांधने के बराबर है।

[74] रसूल की नाफ़रमानी पर अज़ाब का उतरना

इससे मालूम हुआ कि अल्लाह के रसूल की नाफ़रमानी अज़ाब-ए-इलाही को दावत देती है। ग़ौर कीजिए कि इस मक़ाम से पहले फ़िरऔन और उसकी क़ौम शिर्क व कुफ़्र में मुब्तला थे मगर उन पर दुनियावी हलाकत का अज़ाब नहीं आया था। लेकिन जब उन्होंने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की सीधी मुख़ालिफ़त की, तो अज़ाब का क़तई ऐलान फ़रमा दिया गया।

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