कुरान - 20:59 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
قَالَ مَوۡعِدُكُمۡ يَوۡمُ ٱلزِّينَةِ وَأَن يُحۡشَرَ ٱلنَّاسُ ضُحٗى

Transliteration: (Qaala maw'idukum yawmuz zeenati wa ai yuhsharan naasu duhaa)

59. मूसा ने फ़रमाया, 'तुम्हारे वादे का दिन जश्न (मेले) का दिन है [70] और यह कि लोग दिन चढ़े (चाश्त के वक़्त) जमा किए जाएं [71] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 59 की तफ़सीर

"मूसा ने फ़रमाया, 'तुम्हारे वादे का दिन जश्न (मेले) का दिन है [70] और यह कि लोग दिन चढ़े जमा किए जाएं [71] ।' "

[70] जश्न के दिन मुक़ाबले का इन्तख़ाब

इससे मुराद मिस्रियों का सालाना मेला था। इससे मालूम हुआ कि दीनी मक़सद और दावत-ए-हक़ के लिए ग़ैर-मुस्लिमों के इज्तिमाआत में जाना जाइज़ है, जैसा कि हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) बुतों को तोड़ने के लिए बुतख़ाने तशरीफ़ ले गए थे।

[71] 'दिन चढ़े' (चाश्त) का वक़्त

चाश्त का वक़्त इसलिए मुंतख़ब फ़रमाया ताकि भरपूर दिन की रौशनी में हक़ और बातिल का फ़र्क़ सब पर पूरी तरह वाज़ेह हो जाए और कोई शुबहा बाक़ी न रहे।

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