कुरान - 20:64 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
فَأَجۡمِعُواْ كَيۡدَكُمۡ ثُمَّ ٱئۡتُواْ صَفّٗاۚ وَقَدۡ أَفۡلَحَ ٱلۡيَوۡمَ مَنِ ٱسۡتَعۡلَىٰ

Transliteration: (Fa ajmi'oo kaidakum summma'too saffaa; wa qad aflahal yawma manis ta'laa)

64. 'तो अपनी सारी तदबीरें पुख़्ता कर लो [77], फिर सफ़ बांध कर आओ; और आज वही मुराद को पहुँचा जो ग़ालिब रहा [78] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 64 की तफ़सीर

" 'तो अपनी सारी तदबीरें पुख़्ता कर लो [77], फिर सफ़ बांध कर आओ; और आज वही मुराद को पहुँचा जो ग़ालिब रहा [78] ।' "

[77] जादूगरों की सफ़-बंदी और मुनज़्ज़म तैयारी

उन्हें हुक्म दिया गया कि पूरी ताक़त और मंसूबे के साथ सफ़ों में मुनज़्ज़म होकर निकलो ताकि उनका रुअब हज़रत मूसा पर पड़े। तफ़सीर रूहुल मआनी के मुताबिक़ वे बहत्तर सफ़ों में सामने आए, और हर सफ़ में एक हज़ार माहिर जादूगर खड़े थे।

[78] जीत और कामयाबी का पैमाना

उनका ख़याल था कि अगर वे जीत गए तो फ़िरऔन का क़ुर्ब और दौलत हासिल होगी, और अगर मूसा जीत गए तो दरबार में उनका मक़ाम बुलंद हो जाएगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now