कुरान - 20:66 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
قَالَ بَلۡ أَلۡقُواْۖ فَإِذَا حِبَالُهُمۡ وَعِصِيُّهُمۡ يُخَيَّلُ إِلَيۡهِ مِن سِحۡرِهِمۡ أَنَّهَا تَسۡعَىٰ

Transliteration: (Qaala bal alqoo fa izaa hibaaluhum wa 'isiyyuhum yukhaiyalu ilaihi min sihrihim annahaa tas'aa)

66. मूसा ने फ़रमाया, 'बल्कि तुम्हीं डालो [80];' फिर तो उनके जादू के ज़ोर से उनकी रस्सियां और लाठियां मूसा के ख़याल में [81] ऐसी नज़र आने लगीं गोया वे दौड़ रही हैं [82] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 66 की तफ़सीर

"मूसा ने फ़रमाया, 'बल्कि तुम्हीं डालो [80];' फिर तो उनके जादू के ज़ोर से उनकी रस्सियां और लाठियां मूसा के ख़याल में [81] ऐसी नज़र आने लगीं गोया वे दौड़ रही हैं [82] ।"

[80] पहले जादूगरों को डालने की इजाज़त की हिकमत

हज़रत मूसा का फ़रमाना जादू की इजाज़त के लिए नहीं था, बल्कि बातिल को पूरी तरह ज़ाहिर करवाकर फिर उसे हक़ के ज़रिये जड़ से मिटाने के लिए था ताकि लोग बातिल की बेबसी और हक़ की जीत अपनी आँखों से देख सकें।

[81] जादू हक़ीक़त को नहीं बदलता, सिर्फ़ नज़रबंदी करता है

इससे दो अहम बातें साबित होती हैं: पहली यह कि जादू किसी चीज़ की हक़ीक़त को नहीं बदलता बल्कि सिर्फ़ आँखों पर भ्रम और नज़रबंदी पैदा करता है (गोया वे दौड़ रही हैं)। दूसरी यह कि जादू का ज़ाहिरी असर कुछ लम्हों के लिए नबी की निगाह या ख़याल पर भी पड़ सकता है, जो नबूवत की इस्मत के ख़िलाफ़ नहीं है।

[82] ख़याल और एहसास की कैफियत

हज़रत मूसा को भी लगा कि लाठियां और रस्सियां उनकी तरफ़ दौड़ती हुई आ रही हैं, जो नज़रबंदी के शदीद असर का इज़हार था।

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