Transliteration: (Fa awjasa fee nafsihee kheefatam Moosa)
"तो मूसा ने अपने जी में कुछ डर महसूस किया [83] ।"
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी जान के ख़ौफ़ से नहीं डरे थे, बल्कि उन्हें अंदेशा हुआ कि कहीं सादा-लौह अवाम जादू और मौजिज़े में फ़र्क़ न कर सके और बातिल के तमाशे को देखकर मुग़ालते में न पड़ जाए।
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