कुरान - 20:67 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
فَأَوۡجَسَ فِي نَفۡسِهِۦ خِيفَةٗ مُّوسَىٰ

Transliteration: (Fa awjasa fee nafsihee kheefatam Moosa)

67. तो मूसा ने अपने जी में कुछ डर महसूस किया [83] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 67 की तफ़सीर

"तो मूसा ने अपने जी में कुछ डर महसूस किया [83] ।"

[83] ख़ौफ़ की नौइयत: आवाम के बहक जाने का अंदेशा

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी जान के ख़ौफ़ से नहीं डरे थे, बल्कि उन्हें अंदेशा हुआ कि कहीं सादा-लौह अवाम जादू और मौजिज़े में फ़र्क़ न कर सके और बातिल के तमाशे को देखकर मुग़ालते में न पड़ जाए।

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