कुरान - 20:76 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
جَنَّـٰتُ عَدۡنٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ وَذَٰلِكَ جَزَآءُ مَن تَزَكَّىٰ

Transliteration: (Jannaatu 'Adnin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa; wa zaalika jazaaa'u man tazakka (section 3))

76. 'सदा बहार बाग़ात जिनके नीचे नहरें बहती हैं, वे उनमें हमेशा रहेंगे; और यह बदला है उसका जो (गुनाहों व कुफ़्र से) पाक हुआ [99] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 76 की तफ़सीर

" 'सदा बहार बाग़ात जिनके नीचे नहरें बहती हैं, वे उनमें हमेशा रहेंगे; और यह बदला है उसका जो पाक हुआ [99] ।' "

[99] पाकीज़गी और जन्नत की बशारत

जन्नत उन लोगों का ठिकाना है जिन्होंने अपने अक़ीदे और आमाल को पाकीज़ा रखा। इसी ऐलान के बाद फ़िरऔन ने इन मुक़द्दस शोहदा को सूली पर चढ़ाने का हुक्म दिया, और वे इस्लाम के अज़ीम तरीन शहीदों में शामिल हो गए।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now