कुरान - 20:75 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
وَمَن يَأۡتِهِۦ مُؤۡمِنٗا قَدۡ عَمِلَ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ فَأُوْلَـٰٓئِكَ لَهُمُ ٱلدَّرَجَٰتُ ٱلۡعُلَىٰ

Transliteration: (Wa mai ya'tihee mu'minan qad 'amilas saalihaati fa ulaaa'ika lahumud darajaatul 'ulaa)

75. 'और जो शख़्स उसके हुज़ूर मोमिन होकर हाज़िर होगा जिसने नेक आमाल किए हों, तो ऐसे ही लोगों के लिए बुलंद दर्जे हैं [98] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 75 की तफ़सीर

" 'और जो शख़्स उसके हुज़ूर मोमिन होकर हाज़िर होगा जिसने नेक आमाल किए हों, तो ऐसे ही लोगों के लिए बुलंद दर्जे हैं [98] ।' "

[98] आमाल-ए-सालेहा और जन्नत के बुलंद मक़ामात

यह आयत वाज़ेह करती है कि जन्नत के ऊंचे दर्जे ईमान और नेक आमाल के एवज़ अता किए जाएंगे, और कुछ बंदों को नबियों व वलियों की शफ़ाअत से जन्नत की सरफ़राज़ी मिलेगी।

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