कुरान - 20:74 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
إِنَّهُۥ مَن يَأۡتِ رَبَّهُۥ مُجۡرِمٗا فَإِنَّ لَهُۥ جَهَنَّمَ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحۡيَىٰ

Transliteration: (Innahoo mai ya'ti Rabbahoo mujriman fa inna lahoo Jahannama laa yamootu feehaa wa laa yahyaa)

74. 'बेशक जो शख़्स अपने रब के हुज़ूर मुजरिम बनकर हाज़िर होगा, तो यक़ीनन उसके लिए जहन्नम है जिसमें न वह मरेगा और न जिएगा [97] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 74 की तफ़सीर

" 'बेशक जो शख़्स अपने रब के हुज़ूर मुजरिम बनकर हाज़िर होगा, तो यक़ीनन उसके लिए जहन्नम है जिसमें न वह मरेगा और न जिएगा [97] ।' "

[97] ईमान लाते ही रूहानी उलूम का खुलना

इससे मालूम हुआ कि ईमान लाते ही अल्लाह तआला ने उन जादूगरों के दिलों पर इस्लामी अकायद और आख़िरत के हक़ायक़ का इल्हाम फ़रमा दिया। बग़ैर किसी उस्ताद के वे जहन्नम और आख़िरत के अज़ाब के अज़ीम मसाइल बयान करने लगे।

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