कुरान - 36:31 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
أَلَمۡ يَرَوۡاْ كَمۡ أَهۡلَكۡنَا قَبۡلَهُم مِّنَ ٱلۡقُرُونِ أَنَّهُمۡ إِلَيۡهِمۡ لَا يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Alam yaraw kam ahlak naa qablahum minal qurooni annahum ilaihim laa yarji'oon)

क्या उन्होंने नहीं देखा [45] कि हमने उनसे पहले कितनी ही नस्लों को हलाक कर दिया, कि वे अब उनकी तरफ़ पलट कर आने वाले नहीं हैं [46]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 31

"क्या उन्होंने नहीं देखा [45] कि हमने उनसे पहले कितनी ही नस्लों को हलाक कर दिया, कि वे अब उनकी तरफ़ पलट कर आने वाले नहीं हैं [46]?"

[45] तारीखी आसार से ग़फ़लत

कुरैश अपने तिजारती सफ़रों में क़ौमे आद, समूद और मदयन के तबाहशुदा खंडरात देखते थे, मगर अपने तकब्बुर की वजह से कभी इबरत हासिल नहीं करते थे।

[46] अवागावन (तनास Pipeline) और 'रजअत' का क़तई रद्द

इस आयत से साफ़ साबित हुआ कि दुनिया से जाने वाली रूहें कभी दोबारा दुनिया में वापस नहीं आतीं। इससे हिंदू फ़लसफ़ा-ए-तनासख़ (आवागमन/पुनर्जन्म) का क़तई रद्द होता है। इसी तरह यह आयत उन बातिल फ़िरक़ों (शिया के ग़ुलात) का भी रद्द करती है जो यह अक़ीदा रखते हैं कि हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु क़यामत से पहले दुनिया में दोबारा हुकूमत करने आएंगे। मौत के बाद वापसी मुहाल है, इंसान को इस आरज़ी ज़िंदगी ही में नेकी कमा लेनी चाहिए।

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