Transliteration: (In kaanat illaa saihatanw waahidatan fa-izaa hum khaamidoon)
"वह तो बस एक भयानक चीख़ थी, तो अचानक वे सब बुझ कर रह गए [42]!"
हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम ने शहर के दरवाज़े पर आकर एक भयानक चीख़ मारी। उस हैबतनाक आवाज़ से तमाम बस्ती वालों के दिल फट गए, रूहें परवाज़ कर गईं और वे ऐसे ढेर हो गए जैसे आग बुझ कर राख हो जाती है। कोई एक शख़्स भी ज़िंदा न बचा जो दूसरों को दफ़न कर सकता।
तफ़सीर में है कि हज़रत हबीब नज्जार का मज़ार शरीफ़ अंताकिया में आज भी ज़ियारतगाह है जहाँ मुक़द्दस बंदे और आम मुसलमान हाज़िरी देकर बरकत हासिल करते हैं।
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