Transliteration: (Wa maaa anzalnaa 'alaa qawmihee mim ba'dihee min jundim minas-samaaa'i wa maa kunnaa munzileen)
"और हमने उनके बाद उनकी क़ौम पर आसमान से कोई लश्कर नहीं उतारा [41], और न हमें उतारने की कोई ज़रूरत थी;"
हज़रत हबीब नज्जार की शहादत के बाद उस ज़ालिम क़ौम को हलाक करने के लिए अल्लाह को आसमान से फ़रिश्तों की फ़ौज भेजने की हाजत न थी। जंगे बद्र में फ़रिश्ते मोमिनीन की नुसरत और इज़्ज़त के लिए उतारे गए थे, मगर इस नाफ़रमान बस्ती को मिटाना अल्लाह के लिए इतना आसान था कि उसने महज़ एक फ़रिश्ते की एक आवाज़ से पूरी क़ौम को राख कर दिया।
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