कुरान - 36:28 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
۞وَمَآ أَنزَلۡنَا عَلَىٰ قَوۡمِهِۦ مِنۢ بَعۡدِهِۦ مِن جُندٖ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا كُنَّا مُنزِلِينَ

Transliteration: (Wa maaa anzalnaa 'alaa qawmihee mim ba'dihee min jundim minas-samaaa'i wa maa kunnaa munzileen)

और हमने उनके बाद उनकी क़ौम पर आसमान से कोई लश्कर नहीं उतारा [41], और न हमें (लश्कर) उतारने की कोई ज़रूरत थी; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 28

"और हमने उनके बाद उनकी क़ौम पर आसमान से कोई लश्कर नहीं उतारा [41], और न हमें उतारने की कोई ज़रूरत थी;"

[41] बे-नियाज़ी-ए-इलाही और अज़ाब की आसानी

हज़रत हबीब नज्जार की शहादत के बाद उस ज़ालिम क़ौम को हलाक करने के लिए अल्लाह को आसमान से फ़रिश्तों की फ़ौज भेजने की हाजत न थी। जंगे बद्र में फ़रिश्ते मोमिनीन की नुसरत और इज़्ज़त के लिए उतारे गए थे, मगर इस नाफ़रमान बस्ती को मिटाना अल्लाह के लिए इतना आसान था कि उसने महज़ एक फ़रिश्ते की एक आवाज़ से पूरी क़ौम को राख कर दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now