Transliteration: (Qeelad khulil Jannnah; qaala yaa laita qawmee ya'lamoon)
"कहा गया: 'जन्नत में दाख़िल हो जाइए [38]!' उन्होंने कहा: 'हाय काश! मेरी क़ौम जान लेती [39],'"
जैसे ही हज़रत हबीब नज्जार शहीद हुए, अल्लाह तआला ने उनकी रूह को उसी लम्हे जन्नत में दाख़िल फ़रमा दिया। इससे साबित हुआ कि शोहदा-ए-किराम अपनी क़ब्रों और आलमे बर्ज़ख़ में ज़िंदा हैं और जन्नत की नेमतों से फ़ौरन बहरावर होते हैं।
सुब्हानअल्लाह! जिन्होंने उन्हें पत्थरों से मार डाला था, जन्नत में पहुँचकर भी हबीब नज्जार के दिल में उनके लिए कोई इंतिक़ाम या कीना न था, बल्कि वे तमन्ना कर रहे थे कि "काश! मेरी क़ौम को यह मालूम हो जाता कि ईमान की बदौलत मुझे क्या मिला है, ताकि वे भी कुफ़्र छोड़ कर ईमान ले आते और दोज़ख़ से बच जाते!" अल्लाह के नेक बंदे हयात में भी और विसाल के बाद भी मख़्लूक़ के ख़ैरख़्वाह होते हैं।
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