कुरान - 36:26 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
قِيلَ ٱدۡخُلِ ٱلۡجَنَّةَۖ قَالَ يَٰلَيۡتَ قَوۡمِي يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Qeelad khulil Jannnah; qaala yaa laita qawmee ya'lamoon)

(उनकी शहादत पर) उनसे कहा गया, "जन्नत में दाख़िल हो जाइए [38]!" उन्होंने कहा, "हाय काश! मेरी क़ौम जान लेती [39], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 26

"कहा गया: 'जन्नत में दाख़िल हो जाइए [38]!' उन्होंने कहा: 'हाय काश! मेरी क़ौम जान लेती [39],'"

[38] शहादत के फ़ौरन बाद जन्नत का दाख़िला

जैसे ही हज़रत हबीब नज्जार शहीद हुए, अल्लाह तआला ने उनकी रूह को उसी लम्हे जन्नत में दाख़िल फ़रमा दिया। इससे साबित हुआ कि शोहदा-ए-किराम अपनी क़ब्रों और आलमे बर्ज़ख़ में ज़िंदा हैं और जन्नत की नेमतों से फ़ौरन बहरावर होते हैं।

[39] शहीद का बे-मिसाल जज़्बाए ख़ैरख़्वाही

सुब्हानअल्लाह! जिन्होंने उन्हें पत्थरों से मार डाला था, जन्नत में पहुँचकर भी हबीब नज्जार के दिल में उनके लिए कोई इंतिक़ाम या कीना न था, बल्कि वे तमन्ना कर रहे थे कि "काश! मेरी क़ौम को यह मालूम हो जाता कि ईमान की बदौलत मुझे क्या मिला है, ताकि वे भी कुफ़्र छोड़ कर ईमान ले आते और दोज़ख़ से बच जाते!" अल्लाह के नेक बंदे हयात में भी और विसाल के बाद भी मख़्लूक़ के ख़ैरख़्वाह होते हैं।

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