कुरान - 36:25 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
إِنِّيٓ ءَامَنتُ بِرَبِّكُمۡ فَٱسۡمَعُونِ

Transliteration: (Inneee aamantu bi Rabbikum fasma'oon)

"बेशक मैं तुम्हारे रब पर ईमान लाया, पस मेरी बात सुनो [37]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 25

"बेशक मैं तुम्हारे रब पर ईमान लाया, पस मेरी बात सुनो [37]!"

[37] शहादत से पहले बरमला इज़हारे ईमान और गवाही

हज़रत हबीब नज्जार ने रसूलों को मुख़ातब करके फ़रमाया: "ऐ अल्लाह के रसूलों! सुनो और गवाह रहो कि मैं तुम्हारे उस रब पर ईमान लाया हूँ जिसकी तुम इबादत करते हो!" उन्होंने रसूलों को अपने ईमान का गवाह बनाया। यह जुमला कहते ही ज़ालिमों ने उन्हें पत्थरों से कुचल कर शहीद कर दिया। शहीदे आले यासीन का यह अमल क़यामत तक के मोमिनों के लिए मशअले राह है।

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