Transliteration: (Inneee izal-lafee dalaa-lim-mubeen)
"बेशक तब तो मैं खुली गुमराही में हूँगा [36]!"
हबीब नज्जार ने ऐलान फ़रमाया कि अगर मैं ख़ालिक़े कायनात को छोड़कर इन बे-जान पत्थरों की पूजा करूँ तो मैं सरीह और खुली गुमराही में मुब्तला हो जाऊँगा।
उनकी यह पुर-जलाल बात सुनकर काफ़िरों का हुजूम आपे से बाहर हो गया और उन्होंने हज़रत हबीब नज्जार को घेर लिया। ज़ालिमों ने उन पर पत्थरों, लातों और घूंसों की बारिश कर दी। जब हज़रत हबीब नज्जार ने देखा कि शहादत का वक़्त आ गया है, तो उन्होंने रसूलों की तरफ़ रुख़ करके अपने ईमान की गवाही पेश की।
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