Transliteration: ('A-attakhizu min dooniheee aalihatan iny-yuridnir Rahmaanu bidurril-laa tughni 'annee shafaa 'atuhum shai 'anw-wa laa yunqizoon)
"क्या मैं उसे छोड़कर दूसरे माबूद बना लूँ [33]? अगर रहमान मुझे कोई तकलीफ़ पहुंचाना चाहे तो न उनकी शफ़ाअत मेरे कुछ काम आ सकती है [34] और न वे मुझे छुड़ा सकते हैं [35];"
हज़रत हबीब नज्जार ने सवालिया अंदाज़ में बुतों की पूजा की बे-बुनियादी को ज़ाहिर किया कि जो मख़्लूक़ ख़ुद आजिज़ है, उसे ख़ुदा का शरीक बनाना कितनी बड़ी हिमाक़त है। अहले अंताकिया बुतपरस्त थे और वे पत्थरों से अपनी मुश्किलें हल होने की उम्मीद रखते थे।
काफ़िरों के बातिल माबूद अल्लाह के अज़ाब के आगे ज़रा भी सिफ़ारिश नहीं कर सकते। अहले सुन्नत का मुत्तफ़िक़ा अक़ीदा है कि शफ़ाअत ब-इज़ने इलाही हक़ है — जो अल्लाह के अता से हुज़ूर ﷺ, अंबिया और औलिया-ए-किराम फ़रमाएंगे। बुतों के लिए शफ़ाअत का इंकार है क्योंकि वे बे-जान और बातिल हैं।
बुत न किसी को मुसीबत से छुड़ा सकते हैं और न अपनी मदद आप कर सकते हैं। वे हर ऐतबार से लाचार हैं।
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