Transliteration: (Ittabi'oo mal-laa yas'alukum ajranw-wa hum muhtadoon)
"उनकी पैरवी करो जो तुमसे कोई उजरत नहीं मांगते, और वे सीधे रास्ते पर हैं;"
हज़रत हबीब नज्जार ने अपनी क़ौम को निहायत हिकमत भरी दलील दी कि ये रसूल तुमसे कोई दुनियावी माल, दौलत या सरदारी की उजरत नहीं मांगते। जो शख़्स बे-ग़रज़ होकर हक़ की दावत दे और ख़ुद भी सिराते मुस्तक़ीम पर क़ायम हो, उसकी पैरवी लाज़िम है। अंबिया-ए-किराम की दावत महज़ अल्लाह की रज़ा और इंसानियत की भलाई के लिए होती है।
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