कुरान - 36:21 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
ٱتَّبِعُواْ مَن لَّا يَسۡـَٔلُكُمۡ أَجۡرٗا وَهُم مُّهۡتَدُونَ

Transliteration: (Ittabi'oo mal-laa yas'alukum ajranw-wa hum muhtadoon)

"उनकी पैरवी करो जो तुमसे कोई उजरत (बदला) नहीं मांगते, और वे सीधे रास्ते पर हैं; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 21

"उनकी पैरवी करो जो तुमसे कोई उजरत नहीं मांगते, और वे सीधे रास्ते पर हैं;"

हज़रत हबीब नज्जार ने अपनी क़ौम को निहायत हिकमत भरी दलील दी कि ये रसूल तुमसे कोई दुनियावी माल, दौलत या सरदारी की उजरत नहीं मांगते। जो शख़्स बे-ग़रज़ होकर हक़ की दावत दे और ख़ुद भी सिराते मुस्तक़ीम पर क़ायम हो, उसकी पैरवी लाज़िम है। अंबिया-ए-किराम की दावत महज़ अल्लाह की रज़ा और इंसानियत की भलाई के लिए होती है।

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