कुरान - 36:19 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
قَالُواْ طَـٰٓئِرُكُم مَّعَكُمۡ أَئِن ذُكِّرۡتُمۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٞ مُّسۡرِفُونَ

Transliteration: (Qaaloo taaa'irukum ma'akum; a'in zukkirtum; bal antum qawmum musrifoon)

रसूलों ने फ़रमाया, "तुम्हारी नहूसत तो तुम्हारे अपने साथ है [28]; क्या इसलिए कि तुम्हें नसीहत की गई? बल्कि तुम हद से बढ़ जाने वाले लोग हो [29]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 19

"रसूलों ने फ़रमाया: 'तुम्हारी नहूसत तो तुम्हारे अपने साथ है [28]; क्या इसलिए कि तुम्हें नसीहत की गई? बल्कि तुम हद से बढ़ जाने वाले लोग हो [29]!'"

[28] हक़ीक़ी नहूसत अपने कुफ़्र व गुनाह में है

रसूलों ने फ़रमाया कि अस्ल नहूसत और बद-शगुनी तुम्हारा अपना शिर्क, नाफ़रमानी और कुफ़्र है। अल्लाह के रसूल तो सरापा रहमत व बरकत होते हैं, उनकी वजह से कभी नहूसत नहीं आती।

[29] हद से तजावुज़

तुम्हें चाहिए था कि नसीहत पर शुक्र अदा करते, मगर तुमने धमकियां और तकज़ीब शुरू कर दी; तुम सरकश और हद से गुज़र जाने वाले लोग हो।

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