कुरान - 36:18 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
قَالُوٓاْ إِنَّا تَطَيَّرۡنَا بِكُمۡۖ لَئِن لَّمۡ تَنتَهُواْ لَنَرۡجُمَنَّكُمۡ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Qaaloo innaa tataiyarnaa bikum la'il-lam tantahoo lanar jumannakum wa la-yamassan nakum minnaa 'azaabun aleem)

वे बोले, "हम तो तुम्हें मनहूस समझते हैं [25]; अगर तुम बाज़ न आए [26], तो हम तुम्हें ज़रूर संगसार कर देंगे और हमारी तरफ़ से तुम्हें दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा [27]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 18

"वे बोले: 'हम तो तुम्हें मनहूस समझते हैं [25]; अगर तुम बाज़ न आए [26], तो हम तुम्हें ज़रूर संगसार कर देंगे और हमारी तरफ़ से तुम्हें दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा [27]!'"

[25] नेकों पर बद-शगुनी मढ़ना — मुनकिरीन की जहालत

काफ़िरों ने कहा कि तुम्हारे आने से हम पर मुसीबतें (जैसे बारिश का रुकना व क़हत) आ गईं। हक़ीक़त यह थी कि क़हत उनके अपने कुफ़्र व गुनाहों की नहूसत से था, मगर उन्होंने इसका इल्ज़ाम अल्लाह के नेक बंदों पर लगा दिया। जाहिल हमेशा अपने गुनाहों का ठीकरा नेकों के सर फोड़ते हैं।

[26] तबलीग़ से रोकने की ज़िद

उन्होंने धमकी दी कि या तो तुम तबलीग़ छोड़ दो या हमारे शहर से निकल जाओ। बातिल कभी हक़ की आवाज़ बर्दाश्त नहीं कर सकता।

[27] ज़ुल्म व धमकी

उन्होंने रसूलों को पत्थरों से मार डालने (संगसार करने) और बद-तरीन अज़ाब देने की धमकी दी।

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