कुरान - 36:34 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَجَعَلۡنَا فِيهَا جَنَّـٰتٖ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعۡنَٰبٖ وَفَجَّرۡنَا فِيهَا مِنَ ٱلۡعُيُونِ

Transliteration: (Wa ja'alnaa feehaa jannaatim min nakheelinw wa a'naabinw wa fajjarnaa feeha minal 'uyoon)

और हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए, और उसमें चश्मे जारी कर दिए [48]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 34

"और हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए, और उसमें चश्मे जारी कर दिए [48];"

[48] ज़ाहिरी व बातिनी नेमतों का तज़किरा

अल्लाह ने ज़मीन में खजूर और अंगूर जैसे मुक़द्दस व मुफ़ीद फलों के बाग़ लगाए और मीठे पानी के चश्मे बहाए। रूहानी ऐतबार से नुबुव्वत की बारिश से शरीअत के बाग़ात लहलहाते हैं और तरीक़त के चश्मे फूटते हैं। उलमा व औलिया-ए-किराम इन रूहानी चश्मों की तरह हैं जिनसे प्यासी रूहें सैराब होती हैं।

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